श्री हरि विष्णु जी की आरती

 भगवान श्री हरि विष्णु हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं। उन्हें सृष्टि के पालनकर्ता (Protector and Preserver) माना जाता है। ब्रह्मा सृष्टि की रचना करते हैं, भगवान विष्णु उसका पालन करते हैं और भगवान शिव संहार करते हैं। इन तीनों को मिलाकर त्रिमूर्ति कहा जाता है।

भगवान विष्णु धर्म, सत्य और न्याय की रक्षा के लिए समय-समय पर पृथ्वी पर अवतार लेते हैं। उनके दशावतार अत्यंत प्रसिद्ध हैं, जिनमें श्री राम और श्री कृष्ण सबसे अधिक पूजनीय हैं।


श्री हरि विष्णु जी की आरती

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥  ॐ जय जगदीश हरे

जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
सुख-सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय जगदीश हरे

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ मैं जिसकी॥ ॐ जय जगदीश हरे

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय जगदीश हरे

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय जगदीश हरे

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश हरे

दीनबंधु दुःखहर्ता, तुम रक्षक मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय जगदीश हरे

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतों की सेवा॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥



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