एक समय की बात है। वृंदावन के जंगलों में एक युवा शेर रहता था। जंगल के सभी जानवर उससे डरते थे, क्योंकि वह देखने में बहुत भयंकर लगता था।
कोई भी शेर के पास जाने की हिम्मत नहीं करता था।
बंदर अपने बच्चों से कहते, “उस शेर के रास्ते में कभी मत जाना।”
भालू अपने बच्चों को चेतावनी देते, “बच्चों, गुफा के अंदर चले जाओ। शेर शाम की सैर पर निकलने वाला है!”
लेकिन सच्चाई यह थी कि शेर केवल दिखने में भयंकर था। उसका दिल बहुत नरम और दयालु था। वह किसी को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहता था। बल्कि उसे भी दोस्ती की उतनी ही चाहत थी, जितनी किसी जीव को धूप की।
जब शेर विवाह योग्य हुआ, तो उसने अपने लिए एक अच्छी जीवनसंगिनी की तलाश शुरू की। कुछ ही दिनों में उसका विवाह एक सुंदर शेरनी से तय हो गया। पुजारियों से सलाह लेकर विवाह की शुभ तिथि भी निश्चित कर दी गई।
शेर चाहता था कि वृंदावन के जंगल के सभी जानवर उसकी शादी में आएँ।
उसने सोचा, “शायद इस बहाने मैं उन्हें दिखा सकूँ कि मैं इतना बुरा नहीं हूँ।”
इसलिए शेर पूरे जंगल में घूम-घूमकर हर जानवर को अपनी शादी का निमंत्रण देने लगा।
हाथी के पास पहुँचकर शेर ने प्यार से कहा, “प्रिय हाथी! तुम्हें मेरी शादी में ज़रूर आना है। तुम अपनी सूँड से शादी की खुशी में बिगुल बजाना।”
हाथी घबराते हुए बोला, “ज... जी... महाराज! ब... बिल्कुल आऊँगा!”
फिर शेर बंदर के पास गया और बोला, “प्रिय मित्र! तुम तो इतने अच्छे नर्तक हो। तुम्हें मेरी शादी में आकर सबका मनोरंजन करना ही होगा!”
बंदर ने सिर हिलाया और तुरंत वहाँ से छलाँग लगाकर चला गया।
फिर शेर ने भालू से कहा, “प्रिय भालू! शादी की रस्मों के लिए मेरे लिए थोड़ा ताज़ा शहद ज़रूर इकट्ठा कर लेना।”
भालू ने शेर की ओर देखे बिना धीरे से कहा, “जी... ठीक है।”
इसी तरह शेर ने कौए, बिल्ली, हाथी, लोमड़ी, सियार, बंदर, भालू, ऊँट और जिराफ—जंगल में मिलने वाले हर जानवर को अपनी शादी में आने का निमंत्रण दिया।
लेकिन शादी के दिन एक भी निमंत्रित मेहमान विवाह स्थल पर नहीं पहुँचा!
शेर और उसकी दुल्हन सजे हुए मंडप के नीचे बैठे इंतज़ार करते रहे।
समय बीतता गया।
फूल मुरझाने लगे। संगीत की आवाज़ थम गई। और शेर का दिल बहुत उदास हो गया।
कुछ समय बाद एक दिन भालू ने हाथी से पूछा, “तुम शेर की शादी में क्यों नहीं गए थे?”
हाथी ने कहा, “मैं ताकतवर तो हूँ, लेकिन फिर भी शेर से डरता हूँ।”
फिर हाथी ने भालू से पूछा, “और तुम क्यों नहीं गए?”
भालू ने शर्मिंदा होकर कहा, “मैं पर्याप्त शहद इकट्ठा नहीं कर पाया। मुझे डर था कि शेर नाराज़ हो जाएगा और शायद मुझ पर हमला भी कर दे।”
बंदर ने भी स्वीकार किया, “मैं शेर से इतना डरता हूँ कि शायद शादी में एक भी कदम नाच नहीं पाता। डर के मारे मेरे पैर ही काँपते रहते!”
तभी बुद्धिमान कौआ बोला,
“सच है, मित्रों! हम उस व्यक्ति के साथ अपनी खुशी नहीं बाँट सकते, जिससे हम डरते हैं।”
और इस तरह बिना किसी वजह और बिना सच्चाई जाने पैदा हुए डर के कारण, उस दयालु शेर की शादी में एक भी जानवर शामिल नहीं हुआ।
काश, उन जानवरों ने शेर को सच में जानने की कोशिश की होती।
काश, उन्होंने उसकी अयाल, उसके नुकीले दाँत और उसके भारी पंजों से आगे उसके दिल को देखा होता।
तब उन्हें पता चलता कि पूरे वृंदावन में शायद उससे अधिक दयालु हृदय किसी का नहीं था।
कहानी की सीख
किसी को केवल उसके बाहरी रूप से नहीं परखना चाहिए।
दिखावा अक्सर हमें धोखा दे सकता है और उसकी वजह से हम अच्छी दोस्ती और खुशी के खूबसूरत अवसर खो सकते हैं।
किसी व्यक्ति का असली चरित्र उसके बाहरी रूप के नीचे छिपा होता है। बिना सच्चाई जाने पैदा किया गया डर इंसान को अकेला कर देता है।
इसलिए किसी के बारे में धारणा बनाने से पहले उसे जानने की कोशिश करें।