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लकड़हारा और भाग्य की चिड़िया


एक समय की बात है। एक गरीब लकड़हारा था। एक दिन जंगल में लकड़ी काटते-काटते वह बहुत थक गया। वह एक पेड़ के नीचे बैठ गया और कुछ देर आराम करने लगा।

उसी समय एक छोटी-सी चिड़िया वहाँ से उड़ती हुई निकली। उसकी नज़र थके-हारे लकड़हारे पर पड़ी। उसकी दयनीय हालत देखकर चिड़िया को बहुत दुख हुआ।



गधा, कुत्ता, बिल्ली और मुर्गी


कुमाऊँ की पहाड़ियों के नीचे एक गधा रहता था। उसका मालिक एक किसान था, जो उससे दिन-रात काम करवाता था।

एक दिन गधे ने मन ही मन सोचा—

“मेरी आवाज़ कितनी भारी है और मैं कितना अच्छा गा सकता हूँ! मैं इस निर्दयी किसान के लिए क्यों काम करूँ? इसके बजाय मैं पास के शहर में जाकर गाना गाऊँगा और लोगों का मनोरंजन करके अपना जीवन बिताऊँगा!”



भौंरा और गोबर का कीड़ा


वाराणसी शहर से बहुत दूर, धूप से चमकते एक खेत में एक गोबर का कीड़ा रहता था। वह पूरे दिन अपने लिए सुगंधित लगने वाले गाय के गोबर में खुशी-खुशी पड़ा रहता, गोबर की बड़ी-बड़ी गोलियाँ बनाता और बेफिक्र होकर खेलता रहता।