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लोमड़ी और कृतज्ञता


वसंत ऋतु के एक सुंदर दिन दो मित्र एक लड़के के साथ एक खुले पहाड़ी मैदान में फर्न की पत्तियाँ इकट्ठा करने गए थे। लड़के के पास शराब की एक बोतल और खाने-पीने का सामान था। जब वे इधर-उधर घूम रहे थे, तब उन्होंने एक पहाड़ी के नीचे दो लोमड़ियों को अपने बच्चे के साथ खेलते हुए देखा। यह दृश्य उन्हें बहुत विचित्र और रोचक लगा।


नकल में अकल: जब भालू ने गँवाई पूँछ

 


"भगवान की कसम, लल्ला!" एक रात जब छोटा लड़का दौड़ता हुआ अंदर आया, तो अंकल रीमस ने हैरान होकर कहा, "तुमने खाना ठीक से चबाया भी नहीं होगा। अभी तो रात के खाने की घंटी बजी ही थी, और तुम इतनी जल्दी आ गए? ऐसे करोगे तो भूखे ही रह जाओगे।"

चालाकी और बुद्धिमानी की जीत


 एक समय की बात है, अनानजी ने एक योजना बनाई। वह शहर गया और बहुत सारे फैट (चर्बी) के फिर्किन, बहुत सारे बोरे, और बहुत सारे रस्सी के गोले खरीदे, और एक बहुत बड़ा तवा भी लिया। फिर वह खाड़ी गया, और एक शंख फूंका, और समुद्र में हेड-फिश "ग्रीन ईल" को बुलाया। फिर उसने मछली से कहा, "राजा मुझे भेजा है कि तुम सभी मछलियों को किनारे लाना चाहिए, क्योंकि वह उन्हें नई जिंदगी देना चाहता है।"


घमंडी चूहा और समझदार चूहा


एक समय की बात है, एक ही नगर में दो चूहे रहते थे। उनमें से एक ने अपना घर एक गोदाम में बना रखा था, जहाँ अनाज का बड़ा भंडार था। वह वहाँ बहुत खुश और संतुष्ट रहता था, क्योंकि उसे हर दिन भरपूर मात्रा में रखा हुआ अनाज खाने को मिलता था।



श्री सत्यानारयण जी की आरती

 श्री सत्यनारायण भगवान को भगवान विष्णु का एक स्वरूप माना जाता है। वे सत्य, धर्म, श्रद्धा और भक्ति के प्रतीक हैं। भक्तजन अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मनोकामना की पूर्ति के लिए सत्यनारायण व्रत और कथा का आयोजन करते हैं।