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श्री सत्यानारयण जी की आरती

 श्री सत्यनारायण भगवान को भगवान विष्णु का एक स्वरूप माना जाता है। वे सत्य, धर्म, श्रद्धा और भक्ति के प्रतीक हैं। भक्तजन अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मनोकामना की पूर्ति के लिए सत्यनारायण व्रत और कथा का आयोजन करते हैं।


श्री रामचन्द्र जी की आरती

भगवान श्रीराम के बारे में 

भगवान श्रीराम, जिन्हें श्री रामचन्द्र जी, मर्यादा पुरुषोत्तम और रघुनंदन के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म के सबसे पूजनीय देवताओं में से एक हैं। वे भगवान विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं। श्रीराम का जीवन सत्य, धर्म, त्याग, करुणा, न्याय, आदर्श नेतृत्व और कर्तव्यनिष्ठा का सर्वोच्च उदाहरण माना जाता है।


श्री शिव जी की आरती

 भगवान शिव, जिन्हें महादेव, भोलेनाथ, शंकर, नीलकंठ, महेश, रुद्र और आदियोगी के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं। वे त्रिमूर्ति के तीसरे देव हैं और संहार तथा पुनः सृजन के अधिष्ठाता माने जाते हैं। भगवान शिव को अत्यंत दयालु और शीघ्र प्रसन्न होने वाला देव माना जाता है, इसलिए उन्हें आशुतोष भी कहा जाता है।


श्री हनुमान जी की आरती

श्री हनुमान जी हिंदू धर्म के सबसे पूजनीय देवताओं में से एक हैं। वे बल, बुद्धि, भक्ति, साहस और निस्वार्थ सेवा के प्रतीक माने जाते हैं। उन्हें संकटमोचन, बजरंगबली, मारुतिनंदन, पवनपुत्र और अंजनीसुत जैसे अनेक नामों से जाना जाता है। भगवान हनुमान, भगवान श्रीराम के परम भक्त थे और उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन प्रभु श्रीराम की सेवा और धर्म की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया।


श्री हरि विष्णु जी की आरती

 भगवान श्री हरि विष्णु हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं। उन्हें सृष्टि के पालनकर्ता (Protector and Preserver) माना जाता है। ब्रह्मा सृष्टि की रचना करते हैं, भगवान विष्णु उसका पालन करते हैं और भगवान शिव संहार करते हैं। इन तीनों को मिलाकर त्रिमूर्ति कहा जाता है।

भगवान विष्णु धर्म, सत्य और न्याय की रक्षा के लिए समय-समय पर पृथ्वी पर अवतार लेते हैं। उनके दशावतार अत्यंत प्रसिद्ध हैं, जिनमें श्री राम और श्री कृष्ण सबसे अधिक पूजनीय हैं।


श्री गणेश जी की आरती

 श्री गणेश हिंदू धर्म में प्रथम पूज्य देवता माने जाते हैं। किसी भी शुभ कार्य, पूजा, यज्ञ, विवाह, गृह प्रवेश, व्यवसाय या नई शुरुआत से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। उन्हें विघ्नहर्ता (सभी बाधाओं को दूर करने वाले), बुद्धि के देवता, सिद्धि-विनायक तथा गणों के स्वामी कहा जाता है।


श्री बृहस्पतिदेव जी की आरती

श्री वृहस्पतिदेव जी की पूजा वृहस्पतिवार को की जाती है।  वृहस्पति देव जी को धन धान्य का देव माना जाता है इसलिए कहते हैं जिनकी कुंडली में वृहस्पतिदेव जी उच्च स्थिति में होते हैं उनके आस पास धन धान्य भरपूर होता है।  वृहस्पति देव जी को सभी देवताओं का गुरु माना जाता है।  वृहस्पतिवार (गुरुवार) के दिन व्रत में वृहस्पतिदेव जी की आरती करने का विधान है।