एक समय की बात है, एक ही नगर में दो चूहे रहते थे। उनमें से एक ने अपना घर एक गोदाम में बना रखा था, जहाँ अनाज का बड़ा भंडार था। वह वहाँ बहुत खुश और संतुष्ट रहता था, क्योंकि उसे हर दिन भरपूर मात्रा में रखा हुआ अनाज खाने को मिलता था।
दूसरा चूहा एक सुंदर सब्जियों के बगीचे में रहता था। वहाँ रंग-बिरंगी सब्जियाँ, ताजे फल और मनमोहक खुशबू बिखरी रहती थी। उसे रोज ताजा भोजन मिलता था और उसे अपने घर पर बहुत गर्व था।
एक दोपहर गोदाम वाला चूहा घूमते-घूमते बगीचे में पहुँचा और अपने पड़ोसी चूहे से मिला। बातचीत के बाद उसने खुशी से कहा,
“भाई! क्यों न मैं अपने बेटे की शादी तुम्हारी बेटी से कर दूँ?”
बगीचे वाला चूहा अपनी पूरी अकड़ के साथ खड़ा हुआ और हँसने लगा।
वह बोला,
“जरा देखो तो मैं कहाँ रहता हूँ! इस सुंदर बगीचे में! और तुम उस धूल भरे, अँधेरे गोदाम में रहते हो, जहाँ न ताजी हवा है और न खुला आसमान। आखिर मैं तुम्हारा प्रस्ताव क्यों स्वीकार करूँ?”
घमंडी चूहा इधर-उधर अकड़कर टहलने लगा। चलते हुए वह ऊँचे गन्ने के पौधों को हिलाता जा रहा था।
वह बोला,
“क्या तुमने कभी इतनी ताजी और रसदार सब्जियाँ और फल देखे हैं? क्या तुम्हारी बेटी को तुम्हारे उस पुराने और उबाऊ गोदाम में ऐसा स्वादिष्ट भोजन मिल सकता है?”
गोदाम वाले चूहे ने शांत स्वर में कहा,
“लेकिन मेरे गोदाम में भी बहुत सारा अच्छा अनाज है। तुम्हारी बेटी वहाँ आराम से रह सकती है।”
बगीचे वाला चूहा तुरंत बोला,
“हुंह! तुम्हारा सूखा अनाज मेरे स्वादिष्ट भोजन और शुद्ध हवा की बराबरी नहीं कर सकता! यहाँ सूरज कितनी चमक से निकलता है और नीला आसमान कितना सुंदर दिखाई देता है! तुम्हारे उस अँधेरे गोदाम में इनमें से कुछ भी नहीं है!”
घमंडी चूहा लगातार बोलता रहा। वह अकड़कर इधर-उधर घूम रहा था और अपनी आवाज़ भी ऊँची करता जा रहा था।
लेकिन उसे बिल्कुल पता नहीं था कि उसके सिर के ऊपर आसमान में एक गिद्ध काफी देर से चक्कर लगा रहा था।
गिद्ध नीचे जमीन पर अपने अगले शिकार की तलाश कर रहा था। उसकी तेज नजरों ने नीचे हो रही हलचल को देख लिया—हिलते हुए पौधे, भागता हुआ चूहा और पत्तियों की सरसराहट।
गिद्ध ने सोचा,
“वहाँ क्या हो रहा है?”
और वह ध्यान से देखने के लिए नीचे की ओर चक्कर लगाने लगा।
उधर बगीचे वाला चूहा लगातार अपनी शेखी बघारता रहा, जबकि गोदाम वाला चूहा चुपचाप उसकी बातें सुनता रहा।
गिद्ध और नीचे आया।
फिर और नीचे।
और अचानक उसने अपने पंख समेटे और तेजी से बगीचे वाले चूहे पर झपटा।
उसने अपनी मजबूत चोंच से चूहे को पकड़ लिया और उसे हवा में उठा लिया।
गोदाम वाला चूहा यह देखकर डर गया।
वह चिल्लाया,
“तुम कहाँ जा रहे हो? मुझे यहाँ छोड़कर क्यों जा रहे हो?”
बगीचे वाला चूहा हवा में गिद्ध की चोंच से लटका हुआ था। वह नहीं चाहता था कि कोई उसे केवल एक असहाय शिकार समझे।
इसलिए उसने बिना घबराए बड़े ही शाही अंदाज में नीचे आवाज लगाई,
“मैं राजा के महल में एक समारोह में जा रहा हूँ! जब तक मैं वापस नहीं आता, कृपया मेरे घर का ध्यान रखना!”
गिद्ध यह सुनकर एक पल के लिए जैसे हवा में ही रुक गया।
उसने मन ही मन सोचा,
“इससे ज्यादा हास्यास्पद बात और क्या हो सकती है! यह तो अभी मेरा भोजन बनने वाला है और राजा के महल में समारोह की बात कर रहा है!”
गिद्ध अपनी हँसी रोक नहीं पाया।
वह जोर-जोर से हँसने लगा और हँसते-हँसते उसकी चोंच खुल गई।
चूहा उसकी चोंच से नीचे गिर पड़ा।
वह सीधे नरम मिट्टी पर जा गिरा और बिना एक पल गँवाए अपनी पूरी ताकत से अपने बिल की ओर भागा।
आखिरकार वह सुरक्षित अपने बिल के अंदर पहुँच गया।
वह हाँफ रहा था और उसका दिल तेजी से धड़क रहा था।
उसने अपनी किस्मत का शुक्रिया अदा किया और उसी समय एक पक्का संकल्प लिया—
“आज के बाद मैं कम बोलूँगा और अपने आसपास की दुनिया पर ज्यादा ध्यान दूँगा।”
कहानी की सीख
घमंड और शेखी अक्सर अनचाहा ध्यान और खतरा आकर्षित करते हैं।
लेकिन कभी-कभी मुसीबत की घड़ी में थोड़ी-सी हाजिरजवाबी भी जान बचा सकती है।
सबसे बड़ी सीख यही है—कब बोलना है और कब चुप रहकर अपने आसपास ध्यान देना है, यह समझना ही सच्ची बुद्धिमानी है।

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