वाराणसी शहर से बहुत दूर, धूप से चमकते एक खेत में एक गोबर का कीड़ा रहता था। वह पूरे दिन अपने लिए सुगंधित लगने वाले गाय के गोबर में खुशी-खुशी पड़ा रहता, गोबर की बड़ी-बड़ी गोलियाँ बनाता और बेफिक्र होकर खेलता रहता।
वह हर दिन मन ही मन सोचता,
“निश्चित रूप से यही स्वर्ग है!”
वह अपनी छोटी-सी दुनिया में पूरी तरह संतुष्ट और शांत था।
एक दोपहर, जब वह हमेशा की तरह आराम कर रहा था, तभी एक चमकीले पंखों वाली मधुमक्खी वहाँ भिनभिनाती हुई आई।
मधुमक्खी ने कहा,
“नमस्ते, श्रीमान गोबर के कीड़े!”
कीड़ा उत्साहित होकर बोला,
“देखो! हम दोनों कीड़े हैं। हम बहुत अच्छे दोस्त बन सकते हैं!”
मधुमक्खी को यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आई।
उसने कहा,
“हम दोस्त नहीं बन सकते! तुम पूरे दिन उस बदबूदार गोबर में पड़े रहते हो। मैं तो राजा के बगीचे में रहती हूँ, जहाँ चारों ओर सुंदर फूलों की मनमोहक खुशबू फैली रहती है। तुम मेरी बराबरी कैसे कर सकते हो?”
गोबर का कीड़ा निराश नहीं हुआ। उसने घमंडी मधुमक्खी की ओर देखा और शांत स्वर में कहा,
“क्या आप जैसे महान लोगों का यह कर्तव्य नहीं है कि मेरे जैसे गरीब और छोटे लोगों के बारे में सोचें और उनकी मदद करें? आपकी सहायता के बिना हम जैसे असहाय जीव कहाँ जाएँगे?”
मधुमक्खी उसके तर्क से प्रभावित हो गई।
उसने कहा,
“तुम सही कहते हो, कीड़े। मेरे साथ चलो, मैं तुम्हें अद्भुत चीजें दिखाती हूँ!”
गोबर का कीड़ा मधुमक्खी की पीठ पर चढ़ गया और दोनों उड़ते हुए राजा के बगीचे की ओर चल पड़े।
दोनों नए दोस्त कई घंटों तक सुंदर बगीचे के ऊपर उड़ते रहे।
गोबर का कीड़ा वहाँ की हर चीज देखकर मंत्रमुग्ध हो गया।
चारों ओर अलग-अलग रंगों के फूल थे, सुंदर फव्वारे थे और सैकड़ों मधुमक्खियों की मधुर भिनभिनाहट वातावरण में गूँज रही थी।
कीड़ा खुशी से बोला,
“यह सबसे सुंदर बगीचा है, जिसे मैंने आज तक देखा है!”
कुछ समय बाद मधुमक्खी थक गई।
वह बगीचे के तालाब के पास पहुँची और उसने गोबर के कीड़े को कमल के एक बड़े, खुले फूल पर धीरे से बैठा दिया।
मधुमक्खी ने कहा,
“मेरे दोस्त, तुम थोड़ी देर यहाँ आराम करो। मैं जल्द ही वापस आती हूँ।”
और वह बगीचे की ओर उड़ गई।
कमल की पंखुड़ियों की सुगंध और दोपहर की गर्म धूप की नरमी से गोबर का कीड़ा जल्द ही गहरी नींद में सो गया।
लेकिन मधुमक्खी समय पर वापस नहीं आई।
धीरे-धीरे सूरज डूब गया और रात हो गई।
कमल के फूलों की प्रकृति के अनुसार, रात होते ही उसकी पंखुड़ियाँ धीरे-धीरे बंद होने लगीं।
सोता हुआ गोबर का कीड़ा कमल की पंखुड़ियों के बीच अंदर ही फँस गया।
वह सुगंधित अँधेरे में कैद हो गया।
अगली सुबह सूरज की पहली किरणों से कमल के पूरी तरह खिलने से पहले ही एक पुजारी तालाब पर पहुँचा।
वह मंदिर में चढ़ाने के लिए फूल लेने आया था।
उसने वह कमल तोड़ा—और उसके साथ गोबर का कीड़ा भी फूल के अंदर ही रह गया।
पुजारी उसे सावधानी से मंदिर ले गया।
वहाँ उसने कमल को श्रद्धापूर्वक भगवान की मूर्ति पर चढ़ा दिया।
पूरे दिन वह फूल भगवान के सामने रखा रहा।
गोबर का कीड़ा अनजाने में भगवान के चरणों में अर्पित हो गया था।
अगले दिन पुजारी ने मुरझाया हुआ कमल वहाँ से हटा लिया और उसे पवित्र गंगा नदी के किनारे ले गया।
उसने कमल को गंगा के पवित्र जल में प्रवाहित कर दिया।
कमल कुछ समय तक पानी की लहरों पर तैरता रहा।
फिर सुबह की गर्म धूप की किरणें कमल पर पड़ीं।
धीरे-धीरे उसकी पंखुड़ियाँ खुलने लगीं।
और कमल के अंदर से गोबर का कीड़ा सुरक्षित बाहर आ गया।
वह सुनहरी धूप में आँखें झपकाते हुए इधर-उधर देखने लगा।
तभी उसने पास में अपनी दोस्त मधुमक्खी को बेचैनी से उड़ते और उसे खोजते देखा।
मधुमक्खी ने खुशी से पूछा,
“मैं तुम्हें पूरे तीन दिनों से ढूँढ़ रही हूँ! तुम कहाँ चले गए थे?”
गोबर का कीड़ा मुस्कुराया और बोला,
“मेरे प्यारे दोस्त, तुम्हारी वजह से मैंने अपने जीवन का सबसे अद्भुत समय बिताया!”
“पहले मैंने एक सुंदर कमल की गोद में आराम किया। मुझे लगा जैसे मैं स्वर्ग में हूँ।”
“फिर मुझे भगवान के सामने मंदिर में अर्पित किया गया।”
“और अंत में मुझे पवित्र गंगा में स्नान करने का महान सौभाग्य मिला!”
फिर वह खुशी से बोला,
“मेरे दोस्त, हम जैसे छोटे और साधारण जीव भी कितने भाग्यशाली हैं, जब हमें तुम्हारे जैसे महान मित्र मिलते हैं!”
🌿 कहानी की सीख
अच्छी और महान मित्रता छोटे और साधारण व्यक्ति को भी ऊँचाइयों तक पहुँचा सकती है।
एक सच्चा और अच्छा मित्र आपको ऐसे स्थानों तक पहुँचा सकता है, जहाँ आप अकेले कभी नहीं पहुँच पाते—कभी-कभी आपकी कल्पना से भी कहीं आगे।

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