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गधा, कुत्ता, बिल्ली और मुर्गी


कुमाऊँ की पहाड़ियों के नीचे एक गधा रहता था। उसका मालिक एक किसान था, जो उससे दिन-रात काम करवाता था।

एक दिन गधे ने मन ही मन सोचा—

“मेरी आवाज़ कितनी भारी है और मैं कितना अच्छा गा सकता हूँ! मैं इस निर्दयी किसान के लिए क्यों काम करूँ? इसके बजाय मैं पास के शहर में जाकर गाना गाऊँगा और लोगों का मनोरंजन करके अपना जीवन बिताऊँगा!”

अगली सुबह गधा शहर की ओर चल पड़ा।

वह कुछ ही मील गया था कि रास्ते के किनारे उसे एक कुत्ता उदास बैठा दिखाई दिया।

कुत्ता रोते हुए बोला,

“मेरे मालिक ने मुझे घर से निकाल दिया है। अब मेरे पास जाने के लिए कोई जगह नहीं है।”

गधे ने कुत्ते को ध्यान से देखा और खुशी से सिर हिलाया।

“तुम कितनी लय में भौंकते हो!” उसने कहा। “तुम मेरे साथ चलो। हम शहर जाएँगे और अपने गाने से लोगों का मनोरंजन करेंगे।”

कुत्ते की पूँछ खुशी से हिलने लगी और दोनों दोस्त साथ-साथ आगे बढ़ गए।

कुछ मील आगे उन्हें एक आम के पेड़ के नीचे एक बिल्ली दिखाई दी, जो बहुत दुखी होकर म्याऊँ-म्याऊँ कर रही थी।

बिल्ली सुबकते हुए बोली,

“मेरा मालिक मुझे खाने के लिए कुछ नहीं देता।”

गधे ने प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरा और कहा,

“अरे, लेकिन तुम तो कितनी मधुर आवाज़ में म्याऊँ करती हो! हमारे साथ चलो। हम शहर जाएँगे और अपने गाने से लोगों का मनोरंजन करेंगे।”

बिल्ली ने अपने आँसू पोंछे, खुशी से सिर उठाया और उनके साथ चल पड़ी।

कुछ आगे उन्हें रास्ते के बीच एक मुर्गी दिखाई दी। वह घबराई हुई थी और हाँफ रही थी।

मुर्गी बोली,

“मेरा मालिक मुझे बाजार में बेचने वाला था, इसलिए मैं जितनी तेज भाग सकती थी, भागकर यहाँ आ गई!”

गधा मुस्कुराया और बोला,

“तुम कितनी मीठी आवाज़ में कुकड़ूँ-कूँ करती हो! हमारे साथ चलो। हम शहर जाएँगे और अपने गाने से लोगों का मनोरंजन करेंगे।”

मुर्गी ने गर्व से अपने पंख फुलाए और तुरंत उनके साथ चलने के लिए तैयार हो गई।

अब चारों दोस्त खुशी-खुशी शहर की ओर बढ़ने लगे। वे रास्ते भर बातें करते और हँसते रहे।

लेकिन जल्द ही सूरज पहाड़ियों के पीछे डूब गया और रात हो गई।

शहर अभी काफी दूर था। अँधेरे में चलते हुए उन्हें सड़क से कुछ दूर एक घर दिखाई दिया।

उन्होंने सोचा कि शायद वहाँ उन्हें भोजन और रात बिताने के लिए जगह मिल जाए।

वे चुपचाप घर की खिड़की के पास पहुँचे और अंदर झाँकने लगे।

गधे ने अपनी अगली टाँगें खिड़की की चौखट पर रख दीं।

कुत्ता गधे की पीठ पर चढ़ गया।

बिल्ली कुत्ते की पीठ पर बैठ गई।

और मुर्गी सबसे ऊपर बिल्ली के ऊपर जा बैठी।

इस तरह चारों एक-दूसरे के ऊपर चढ़कर खिड़की से अंदर देखने लगे।

गधे ने अपने तीनों साथियों की ओर देखा और कहा,

“चलो, इस घर के लोगों के लिए गाना गाते हैं। शायद वे हमें खाना और रहने की जगह दे दें!”

और फिर चारों ने एक साथ अपनी पूरी ताकत से गाना शुरू कर दिया।

गधा जोर-जोर से रेंकने लगा।

कुत्ता पूरी लय में भौंकने लगा।

बिल्ली मधुर आवाज़ में म्याऊँ-म्याऊँ करने लगी।

और मुर्गी अपनी सबसे मीठी आवाज़ में कुकड़ूँ-कूँ करने लगी।

संयोग से वह घर दो चोरों का था, जो दीपक की रोशनी में अपना चुराया हुआ खजाना गिन रहे थे।

जब उन्होंने खिड़की पर एक के ऊपर एक चढ़े हुए चारों जानवरों की अजीब आकृति देखी और इतना भयंकर शोर सुना, तो वे डर के मारे उछल पड़े।

उन्हें लगा कि खिड़की के बाहर कोई भयानक राक्षस खड़ा है, जिसकी चार अलग-अलग आवाज़ें हैं।

दोनों चोर चीखने लगे,

“बचाओ! बचाओ! खिड़की के बाहर कोई भयानक जीव है!”

वे घबराकर पिछले दरवाजे से भाग गए और फिर कभी वापस नहीं लौटे।

गधे ने खाली घर को देखा और दार्शनिक अंदाज में अपना लंबा सिर हिलाया।

वह बोला,

“अरे! लगता है उन्हें अच्छे संगीत की बिल्कुल समझ नहीं थी!”

तभी उसकी नजर दीपक की रोशनी में चमक रहे खजाने से भरे खुले संदूक पर पड़ी।

गधा खुशी से बोला,

“लेकिन देखो, वे हमारे लिए क्या छोड़ गए हैं! यहाँ इतना धन है कि अब हमें शहर जाकर काम करने की कोई जरूरत ही नहीं!”

चारों दोस्त खुशी से झूम उठे।

उन्होंने उस गर्म और आरामदायक घर को अपना घर बना लिया, खजाने को आपस में समझदारी से बाँट लिया और बहुत लंबे समय तक खुशी-खुशी साथ रहते रहे।

कहानी की सीख

जब दोस्त एकजुट होकर अपनी-अपनी खूबियों का सही इस्तेमाल करते हैं, तो वे अकेले से कहीं अधिक बड़ा काम कर सकते हैं।

एकता और टीमवर्क ऐसी ताकत है, जो साधारण से साधारण प्रतिभा को भी असाधारण सफलता में बदल सकती है।


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